October 9, 2026
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कागजों में गायब हाईटेंशन लाइन, जमीन पर बिल्डरों का खेल; एचआरडीए और ऊर्जा निगम की कार्यशैली पर सवाल

रश्मि कश्यप

हरिद्वार। श्यामपुर कांगड़ी में हाईटेंशन विद्युत लाइन के नीचे कॉलोनी काटे जाने का मामला सामने आने के बाद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बिल्डरों ने प्लॉटिंग का काम शुरू कर दिया, जबकि भवन मानचित्र की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों में भूमि के ऊपर विद्युत लाइन नहीं होने की जानकारी दर्ज है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी और मौके पर मौजूद हाईटेंशन लाइन की स्थिति के बीच अंतर ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। श्यामपुर कांगड़ी में प्लॉटिंग का काम तेजी से किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब भूमि के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, तो भवन मानचित्र की स्वीकृति से संबंधित प्रक्रिया में इसका सत्यापन किस आधार पर किया गया? यदि दस्तावेजों में विद्युत लाइन का उल्लेख नहीं है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था या केवल कागजी जानकारी के आधार पर अनुमति संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई? इन सवालों के जवाब अब संबंधित विभागों को देने होंगे। इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर भी पहले विवाद सामने आ चुका है। आरोप है कि बिल्डरों ने उद्यान विभाग से 12 और 13 पेड़ों की कटाई की अनुमति ली थी, लेकिन इसके बाद 100 से अधिक आम और लीची के हरे-भरे पेड़ काट दिए गए। आरोप यह भी है कि इस कटाई में वन माफिया की भूमिका रही। अनुमति से अधिक पेड़ काटे जाने के आरोपों की वास्तविकता की जांच भी जरूरी है। उस समय पेड़ों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरने और भविष्य में जान-माल के नुकसान की आशंका का हवाला दिया गया था। अब उसी क्षेत्र में हाईटेंशन लाइन के नीचे प्लॉटिंग का मामला सामने आने से विभागीय अनुमतियों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यदि मौके पर विद्युत लाइन मौजूद है, तो इसकी अनदेखी कैसे हुई? क्या एचआरडीए और ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने आपसी समन्वय से भूमि की स्थिति का सत्यापन किया था? लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोप भी विभागों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं। मामले में अब निष्पक्ष जांच, अनुमति संबंधी अभिलेखों के सत्यापन और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किए जाने की जरूरत है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हाईटेंशन लाइन के नीचे प्लॉटिंग किस आधार पर की जा रही है और संबंधित विभागों ने अब तक क्या कार्रवाई की है।

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