July 2, 2026
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‘DFO हटाओ, जंगल बचाओ’ के नारों से गूंजा वन विभाग कार्यालय, जन अधिकार पार्टी ने फूंका डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का पुतला

HOFF कार्यालय पर अगले प्रदर्शन का अल्टीमेटम; राजाजी में बाघों की मौत, अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग

हरिद्वार। प्रदीप यदुवंशी

वन विभाग की कार्यशैली के विरोध में शुक्रवार को जन अधिकार पार्टी ने हरिद्वार स्थित प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “DFO हटाओ, जंगल बचाओ” के नारे लगाते हुए डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का पुतला दहन किया और उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ दिन पूर्व उत्तराखंड के HoFF रंजन कुमार मिश्रा को डीएफओ के खिलाफ विस्तृत लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद विभागीय कार्यशैली में सुधार नहीं आया, जिससे वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जन अधिकार पार्टी ने आरोप लगाया कि राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत, वन्यजीवों के शिकार, वन क्षेत्रों में कथित अवैध खनन तथा पेड़ों की कटाई की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वन तस्कर सक्रिय हैं, जबकि विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने डीएफओ पर कथित भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र में भी बाघ सुरक्षित नहीं हैं तो अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर स्वतः प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उन्होंने शासन से डीएफओ को तत्काल हटाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान वन विभाग की ओर से एसडीओ पूनम कांटोला ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर उनकी शिकायतें सुनीं और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि प्रदर्शनकारी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे।

जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष आजाद अली ने चेतावनी दी कि यदि डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन का अगला प्रदर्शन HoFF रंजन कुमार मिश्रा के कार्यालय पर होगा।

वन विभाग के खिलाफ उठे इन आरोपों और विरोध प्रदर्शन के बाद अब निगाहें शासन और उच्च अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। समाचार में उल्लिखित आरोप प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए हैं; इन पर विभाग की ओर से आधिकारिक जांच या निष्कर्ष आना शेष है।

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