May 21, 2026
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हरिद्वार वन क्षेत्र अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित नहीं?

24 घंटे में दो बाघों की मौत और एक बाघिन के लापता होने से हड़कंप, डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध की कार्यशैली पर उठे सवाल, कार्रवाई करेगा कौन?

हरिद्वार | प्रदीप यदुवंशी

जहां केंद्र और राज्य सरकारें वन्यजीवों की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाओं और परियोजनाओं के बड़े दावे करती नजर आती हैं, वहीं हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज से सामने आई दो बाघों की हत्या और एक बाघ के लापता होने की घटना ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 घंटे के भीतर पहले नर बाघ और फिर मादा बाघिन का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। वहीं एक अन्य बाघ के लापता होने की चर्चाओं ने वन विभाग की चिंता और बढ़ा दी है।

 

स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि वन विभाग की कमजोर मॉनिटरिंग और लापरवाही के चलते वन क्षेत्र अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। लगातार बढ़ रहे वन्यजीव अपराधों के बीच जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।

जहरीला मांस बना मौत की वजह

सूत्रों और विभागीय जानकारी के अनुसार श्यामपुर रेंज के सजनपुर क्षेत्र में सबसे पहले करीब दो वर्षीय नर बाघ का शव बरामद हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक मरी हुई भैंस के शव में जहर मिलाया गया था, जिसे खाने के बाद बाघ की मौत हुई। इसके बाद वन विभाग ने इलाके में कॉम्बिंग अभियान चलाया तो कुछ दूरी पर पत्तों से ढका करीब दो वर्षीय मादा बाघिन का शव भी बरामद किया गया।

बताया जा रहा है कि पहले बाघिन ने वन गुर्जरों की भैंस का शिकार किया था। इसके बाद बदले की भावना में जहरीला मांस रखा गया। माना जा रहा है कि उसी जहरीले मांस को खाने से दोनों बाघों की मौत हुई।

पंजे काटे, खाल उतारने की थी तैयारी

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब मादा बाघिन के चारों पंजे कटे मिले। पूछताछ में आरोपी द्वारा रात में खाल उतारने की तैयारी की बात भी सामने आई है। इससे वन्यजीव तस्करी और संगठित शिकार गिरोह की आशंका और गहरी हो गई है।

वन विभाग के अनुसार 18 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर छापेमारी की गई। मामले में आमिर हमजा उर्फ मिया पुत्र शमशेर गुर्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद आशिक पुत्र गामा और जुप्पी पुत्र अल्लु की भी गिरफ्तारी की गई है। वहीं अन्य संदिग्धों की तलाश अभी जारी बताई जा रही है।

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध की कार्यशैली पर सवाल

लगातार दो बाघों की मौत के बाद हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध, एसडीओ पूनम कैंथोला और श्यामपुर रेंज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल के भीतर इतनी बड़ी घटनाएं होती रहीं और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

इस पूरे मामले में न्यूज़ हरिद्वार द्वारा डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध से बात करने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने कैमरे पर बयान देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वह अपना स्पष्टीकरण पहले ही विभागीय ग्रुप में साझा कर चुके हैं और जांच जारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार टीमें काम कर रही हैं।

वहीं एसडीओ पूनम कैंथोला से संपर्क नहीं हो सका। जबकि रेंजर विनय राठी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। हालांकि क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत होती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।

घटना के बाद मातृ सदन की प्रतिक्रिया

मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने विभाग पर लगाए लीपा पोती के आरोप, और कहां टाइगरों की हत्या ने यह सिद्ध कर दिया है कि बाकी वन्य जीवों के क्या हालात होंगे, इस मामले में तत्काल हाईकोर्ट को संज्ञान लेना चाहिये।

घटना से क्षेत्र में बढ़ता आक्रोश

घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। लोगों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में वन्यजीव अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विभाग स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा कौन?

स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वन क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ सकती है।

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