“सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के पीछे दर्द की कहानी! परिवार बोला— ‘मेरा बेटा अपराधी नहीं, हालात का मारा है'”
“सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के पीछे दर्द की कहानी! परिवार बोला— ‘मेरा बेटा अपराधी नहीं, हालात का मारा है'”
रिपोर्ट : विजय यादव
इटावा। सुप्रीम कोर्ट में कथित हंगामे के बाद सुर्खियों में आए इटावा के भरथना क्षेत्र के नगला जयपाल निवासी प्रबल प्रताप यादव के परिवार ने बेटे का बचाव करते हुए कहा है कि वह कोई अपराधी नहीं, बल्कि आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और साइबर ठगी जैसी परिस्थितियों से जूझ रहा था।
परिजनों के अनुसार नौकरी छूटने के बाद प्रबल ट्यूशन पढ़ाकर एलएलबी की पढ़ाई का खर्च उठा रहा था। इसी दौरान वह साइबर ठगी का शिकार हो गया। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से वह लगातार तनाव में रहने लगा। परिवार का कहना है कि इसी तनाव का असर उसके व्यवहार पर पड़ा।
मां कुंती देवी ने भावुक होकर कहा, “मेरा बेटा अपराधी नहीं है।” वहीं पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि प्रबल ने कभी किसी आपराधिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया और गांव में उसकी पहचान एक शांत और पढ़ाई-लिखाई करने वाले युवक की रही है।
बताया जाता है कि नौकरी और वेतन विवाद को लेकर प्रबल ने पहले निचली अदालत, फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
क्या है पूरा मामला?
10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप यादव पर न्यायाधीशों के समक्ष फाइल फेंकने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगा। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्ट कक्ष से बाहर कर दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता काफी हताश और परेशान प्रतीत होता है तथा उसके व्यवहार पर अलग से कार्रवाई आवश्यक नहीं समझी गई।

































































































































































































































































































































