कांवड़ यात्रा के शुरुआती दौर में ही दो शिवभक्तों की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल
निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे रखा भारी लोहे का गाटर गिरा, दो कांवड़ियों की मौके पर दर्दनाक मौत; एक दिन पहले चार कांवड़ियों के डूबने की घटना के बाद फिर हादसा
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और हरिद्वार में लगातार सामने आ रहे हादसों ने शासन-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को बहादराबाद कोतवाली क्षेत्र के बढ़ेड़ी राजपूतान गांव के पास निर्माणाधीन हाईवे फ्लाईओवर के नीचे आराम कर रहे दो कांवड़ियों के ऊपर भारी लोहे का गाटर गिर गया। हादसे में मोदीपुरम, गाजियाबाद निवासी कृष्णा (22) और तनुज कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों कांवड़िए यात्रा के दौरान कुछ देर आराम करने के लिए फ्लाईओवर के नीचे रुके थे। इसी दौरान वहां रखा भारी लोहे का चैनल/गाटर खिसककर उनके ऊपर जा गिरा। कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे डीजे की धमक को गाटर के खिसकने से जोड़कर बताया है, हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारी लोहे की चपेट में आने से दोनों कांवड़िए गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद कांवड़ियों और लोगों ने उन्हें निकालने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का भी है
कांवड़ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल है। हर साल करोड़ों शिवभक्त हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में निर्माणाधीन फ्लाईओवर, सड़क किनारे रखी निर्माण सामग्री, भारी लोहे के गाटर और अन्य संवेदनशील स्थानों को लेकर पहले से सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं।

यात्रा के शुरुआती दौर में ही दो कांवड़ियों की जान चले जाना और इससे पहले चार कांवड़ियों के डूबने की घटना सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। सवाल उठना लाजिमी है कि जब कांवड़ मार्ग पर लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही हो रही है तो निर्माणाधीन परियोजनाओं और उनके आसपास रखी भारी सामग्री की सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है?
क्या निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे कांवड़ियों के रुकने पर रोक थी? अगर थी तो वहां प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई? भारी लोहे के गाटर को सुरक्षित तरीके से क्यों नहीं रखा गया? क्या कांवड़ मार्ग पर निर्माणाधीन स्थलों का प्रशासन और संबंधित विभागों ने सुरक्षा ऑडिट किया था?
एक हादसा नहीं, व्यवस्था के लिए चेतावनी
कांवड़ यात्रा के दौरान हर छोटी लापरवाही का परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, सड़क किनारे विश्राम करते हैं और कई जगह निर्माणाधीन सड़कों व पुलों के आसपास से गुजरते हैं। ऐसे में एक ढीला गाटर, एक खुला गड्ढा, असुरक्षित निर्माण सामग्री या मामूली चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
अब जरूरत केवल हादसे के बाद जांच की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है। शासन-प्रशासन को कांवड़ मार्ग पर निर्माणाधीन सभी पुलों, फ्लाईओवरों, बैरिकेडिंग, विद्युत व्यवस्था, जलभराव वाले स्थानों और विश्राम स्थलों का तत्काल सुरक्षा निरीक्षण कराना चाहिए, ताकि एक और परिवार को अपने बेटे की मौत का दर्द न झेलना पड़े।

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे की परिस्थितियों और कारणों की जांच की जा रही है।






































































































































































































































































































































