हरिद्वार डीएफओ पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप, HOFF को सौंपा साक्ष्यों सहित शिकायत पत्र
डबल टाइगर हत्याकांड, हाथियों की संदिग्ध मौत, अवैध खनन, पेड़ कटान और अतिक्रमण मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग

हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के चलते चर्चा में है। जन अधिकार पार्टी जनशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद अली ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) स्वप्निल अनिरुद्ध के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और वन्यजीव संरक्षण में विफलता के आरोप लगाते हुए प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) को साक्ष्यों सहित शिकायत पत्र सौंपा है। शिकायत में डीएफओ को पद से हटाकर उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
राजाजी रिजर्व टाइगर में डबल टाइगर हत्याकांड बना बड़ा सवाल

शिकायत में राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के चर्चित डबल टाइगर हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं और मुख्य आरोपी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण भी कर दिया था। इसके बावजूद बाघों के पंजों सहित महत्वपूर्ण अवशेषों की पूर्ण बरामदगी नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले में अब भी कई बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं आ सकी है।
हाथियों की मौत, अवैध खनन और पेड़ कटान पर सवाल

शिकायतकर्ताओं ने वन क्षेत्र में हुई हाथियों की संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही अवैध खनन, अवैध पेड़ कटान, वन भूमि पर अतिक्रमण और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई नहीं पहुंच सकी, जिससे विभाग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े हुए हैं।
मातृसदन ने भी उठाए थे सवाल
गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्षरत मातृसदन भी पूर्व में डीएफओ की कार्यशैली पर सवाल उठा चुका है। मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने राजाजी टाइगर रिजर्व में टाइगरों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की थीं। वहीं बाघ प्रकरण के बाद क्षेत्रीय रेंजर विनय राठी के निलंबन और विभागीय जांच के आदेशों ने चर्चाओं को और तेज कर दिया था।
उच्चस्तरीय जांच की मांग

जन अधिकार पार्टी जनशक्ति ने मांग की है कि डबल टाइगर हत्याकांड, हाथियों की मौत, अवैध खनन, पेड़ कटान और अतिक्रमण समेत सभी विवादित मामलों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को पद से हटाया जाए।
वन विभाग से जुड़े लगातार विवादों और शिकायतों के बाद अब इस पूरे मामले पर शासन स्तर की नजरें टिक गई हैं। विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सबकी निगाहें वन मंत्री और शासन स्तर पर होने वाले फैसलों पर टिकी हैं।

























































































































































































































































































































