मातृसदन के ब्रह्मचारी की याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा दखल, दीपक रावत प्रकरण में नए सिरे से होगी सुनवाई
दो निचली अदालतों के आदेश निरस्त, ट्रायल कोर्ट को दोबारा सुनवाई के निर्देश; मातृसदन ने फैसले को न्याय की दिशा में अहम कदम बताया
हरिद्वार। मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती के शिष्य ब्रह्मचारी आपबोध आनंद की ओर से दायर शिकायत में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। अदालत ने मामले में पारित ट्रायल कोर्ट और पुनरीक्षण न्यायालय के आदेशों को निरस्त करते हुए प्रकरण को नए सिरे से विचार के लिए फिर ट्रायल कोर्ट भेज दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में पारित दोनों आदेश विधिक कसौटी पर टिकने योग्य नहीं हैं, इसलिए मामले की दोबारा सुनवाई आवश्यक है।
मामले में इससे पहले 18 फरवरी 2026 को पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक रावत की ओर से अधिवक्ता ने शिकायत का विरोध किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए दोनों अदालतों के आदेशों को निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मातृसदन ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने वाला निर्णय बताया है। संस्था का कहना है कि यह केवल एक शिकायतकर्ता को मिली राहत नहीं, बल्कि न्यायिक जवाबदेही, विधि के शासन और नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मातृसदन का कहना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण में प्रमाणित होते हैं, तो तत्कालीन जिलाधिकारी का कथित आचरण संवैधानिक पद की गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। संस्था ने उम्मीद जताई है कि अब ट्रायल कोर्ट उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण कर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
































































































































































































































































































































