क्या हरिद्वार में कालाबाजारी का जाल?
सिगरेट से गैस सिलेंडर तक दाम बेकाबू, प्रशासन का दावा — सब कुछ सामान्य, लेकिन धरातल पर उपभोक्ता बेहाल
हरिद्वार।
देवभूमि हरिद्वार में इन दिनों बाजार व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते दिखाई दे रहे हैं। सिगरेट से लेकर घरेलू गैस सिलेंडर, खाद्य पदार्थों से लेकर पेट्रोलियम उत्पादों तक अनेक आवश्यक वस्तुएं कथित रूप से कालाबाजारी और मनमाने दामों की गिरफ्त में बताई जा रही हैं। दुकानों और एजेंसियों पर निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जबकि प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता फिलहाल धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही।
स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि बाजार में कई रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम अधिकतम खुदरा मूल्य से ऊपर वसूले जा रहे हैं। सिगरेट, पैक बंद खाद्य सामग्री, दाल-चावल, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं तक में अतिरिक्त कीमत ली जा रही है। कई दुकानदार “माल महंगा आ रहा है” या “आपूर्ति कम है” जैसे तर्क देकर उपभोक्ताओं से निर्धारित दरों से अधिक धनराशि ले रहे हैं।
सबसे अधिक शिकायतें घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां घर बैठे गैस बुक कराकर सिलेंडर की घर तक आपूर्ति हो जाती थी, वहीं अब अनेक उपभोक्ताओं की बुकिंग समय पर नहीं हो पा रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। आरोप यह भी हैं कि लगभग एक हजार रुपये के आसपास मिलने वाला घरेलू गैस सिलेंडर कई स्थानों पर पंद्रह सौ से दो हजार रुपये तक की कीमत देकर लेना पड़ रहा है, जिससे कालाबाजारी की आशंका और गहरी होती दिखाई देती है।
श्यामपुर क्षेत्र स्थित चामुंडा मंदिर से जुड़े 96 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक बहादुर चंद मेहंदी दत्त का कहना है कि पहले बाजार व्यवस्था पर एक प्रकार का नियंत्रण दिखाई देता था, किंतु अब वह नियंत्रण शिथिल होता नजर आ रहा है। उनके अनुसार खाद्य पदार्थों की कीमतें पहले निर्धारित मानकों के भीतर रहती थीं, जबकि वर्तमान समय में अनेक वस्तुएं तय दरों से अधिक मूल्य पर बेची जा रही हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर संत समाज ने भी चिंता व्यक्त की है। वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि का कहना है कि शासन और प्रशासन की व्यवस्थाओं में कई प्रकार की कमियां दिखाई दे रही हैं। उनका कहना है कि जब बाजार में कालाबाजारी और मूल्य नियंत्रण को लेकर लगातार प्रश्न उठ रहे हों, तब प्रशासन का दायित्व है कि वह सक्रियता दिखाते हुए व्यवस्था को पटरी पर लाए, अन्यथा इसका प्रत्यक्ष प्रभाव आम नागरिक पर पड़ता है।
वहीं मातृसदन के संस्थापक ने भी व्यवस्था को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उनका कहना है कि यदि शासन की नीतियां और प्रशासनिक नियंत्रण धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं होते, तो उसका खामियाजा अंततः आम नागरिक को भुगतना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की प्रवृत्तियों पर कठोर निगरानी और नियंत्रण स्थापित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन का पक्ष कुछ अलग दिखाई देता है। हरिद्वार के जिलाधिकारी का कहना है कि जनपद में घरेलू गैस की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और किसी प्रकार की घबराहट की स्थिति उत्पन्न करने की आवश्यकता नहीं है।
इसी प्रकार खाद्य पूर्ति अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि जनपद में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है और सभी उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि प्रशासनिक दावों और जमीनी वास्तविकता के बीच एक स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। उपभोक्ताओं की मानें तो गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, बुकिंग में देरी और अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि बाजार व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं।
दरअसल बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, पूर्ति विभाग और नियंत्रण अधिकारियों की होती है। ऐसे में जब खुलेआम अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हों, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है और क्या संबंधित विभाग बाजार की वास्तविक स्थिति पर पर्याप्त नजर रख पा रहे हैं।
यदि समय रहते इन आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया, तो कालाबाजारी और मनमाने दामों का यह सिलसिला आम उपभोक्ता के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन सकता है। फिलहाल हरिद्वार में प्रशासनिक दावों और बाजार की वास्तविकता के बीच की दूरी ही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा प्रश्न बनती जा रही है।
स्थल रिपोर्ट: बाजार में ऐसे बढ़ाए जा रहे दाम
| वस्तु | निर्धारित कीमत (लगभग) | बाजार में वसूली जा रही कीमत |
|---|---|---|
| घरेलू गैस सिलेंडर | लगभग 1000 रुपये | 1500 – 2000 रुपये |
| सिगरेट (पैक) | अधिकतम खुदरा मूल्य | कई दुकानों पर अधिक वसूली |
| पैक बंद खाद्य पदार्थ | अधिकतम खुदरा मूल्य | अतिरिक्त 5 से 10 रुपये |
| दाल–चावल | थोक दर के अनुसार | खुदरा में बढ़े हुए दाम |
| खाद्य तेल | तय बाजार दर | कई दुकानों पर बढ़ा हुआ मूल्य |
बड़े सवाल
- क्या हरिद्वार में कालाबाजारी पर प्रशासन की निगरानी कमजोर पड़ रही है?
- पूर्ति विभाग और नियंत्रण अधिकारी बाजार की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ हैं या अनदेखी कर रहे हैं?
- घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था में आ रही शिकायतों के पीछे वास्तविक कारण क्या है?
- प्रशासनिक दावों और जनता की परेशानी के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है




































































































































































































































































































