March 12, 2026
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आत्मरक्षा गोलीकांड वाली ऊषा टाउनशिप पर हाईकोर्ट सख्त — HRDA की बोर्ड बैठक पर सवाल, अवैध प्लॉटिंग पर लगी रोक

कृषि और बाग की जमीन पर ग्रुप हाउसिंग की अनुमति पर कोर्ट नाराज
19 मार्च को राज्य सरकार और HRDA को देना होगा जवाब

हरिद्वार में बहुचर्चित ऊषा टाउनशिप और कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कृषि भूमि को आवासीय और ग्रुप हाउसिंग के लिए परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

मामला किसान और भूमि अधिकार कार्यकर्ता अतुल कुमार चौहान द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंचायत, कृषि और बाग की जमीनों को अवैध रूप से काटकर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की जा रही है और उन्हें आवासीय कॉलोनियों के रूप में बेचा जा रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले भी एक जनहित याचिका में न्यायालय ने निर्देश दिया था कि जब तक राज्य सरकार इस विषय में कोई स्पष्ट कानून नहीं बनाती, तब तक कृषि और बाग की जमीन को ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस निर्देश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया और राज्य सरकार को केवल स्पष्टीकरण लेने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बावजूद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में कृषि भूमि को आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तित करने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।

खंडपीठ ने कहा कि यदि इस प्रकार के निर्णय न्यायालय के निर्देशों के विपरीत लिए गए हैं तो यह गंभीर मामला है। अदालत ने HRDA के अधिवक्ताओं को एक सप्ताह का समय देते हुए पूछा है कि बोर्ड बैठक के निर्णय को न्यायालय की अवमानना क्यों न माना जाए।

साथ ही राज्य सरकार से भी यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि कृषि भूमि पर अवैध निर्माण रोकने के लिए क्या कोई ठोस नीतिगत निर्णय लिया गया है और भविष्य की आवासीय जरूरतों को देखते हुए क्या कोई लैंड बैंक नीति तैयार की गई है या नहीं।

अदालत ने निर्देश दिया है कि HRDA की बोर्ड बैठक के आधार पर किसी भी प्रकार की नई गतिविधि या निर्माण फिलहाल नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य सरकार और HRDA को अपना पक्ष रखना होगा।

इधर इस प्रकरण को लेकर हरिद्वार में चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से कृषि भूमि और पंचायत भूमि को बचाने की मांग उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इसे एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप मान रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण के बाद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी है और प्राधिकरण की छवि पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक ओर आम नागरिकों के छोटे-छोटे मकानों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं बड़े पैमाने पर हो रही कॉलोनियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती।

वहीं इस मामले से जुड़े शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता अतुल चौहान का कहना है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद कॉलोनी का निर्माण होता रहा और उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें मानसिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा और यहां तक कि उन्हें जेल भी भेजा गया।

अब सभी की नजर 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां इस पूरे विवादित मामले की दिशा तय होगी।

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