February 8, 2026
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इटावा में कथा के नाम पर जातीय हमला, अब हरिद्वार से उठी संतों की हुंकार,,

“शंकराचार्य बोले – शर्मनाक घटना,    हिन्दू रक्षा सेना ने बताया “हिमालय-सा रोड़ा”,                                      आनंद स्वरूप की टिप्पणी पर संत समाज में नाराज़गी”

इटावा/हरिद्वार। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दादरपुर गांव में कथावाचक मुकुट मणि और संत सिंह यादव पर कथित जातिगत हमले ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। यह कथा स्थानीय नहीं थी—जिस परिवार ने आयोजन करवाया, वह हरिद्वार निवासी है, और अब हरिद्वार के संत समाज से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

 

21 जून की रात, यादव कथावाचकों की जाति उजागर होने पर उनका सिर मुंडवा दिया गया, महिला के चरणों में नाक रगड़वाया गया, और मारपीट कर गांव से निकाल दिया गया। घटना का वीडियो वायरल हुआ तो 23 से अधिक गिरफ्तारी हुई, लेकिन सियासी और धार्मिक विवाद की चिंगारी अब हरिद्वार से भी धधकने लगी है।

 

🕉️ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले – “धर्म के नाम पर हिंसा, अत्यंत शर्मनाक”

 

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा

 

> “धर्म कभी अपमान की अनुमति नहीं देता। कथा कहने वाले चाहे किसी जाति के हों, अगर उनका ज्ञान और भाव ठीक है, तो उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। यह घटना सनातन धर्म के विपरीत और अत्यंत शर्मनाक है।”

 

🛡️ हिन्दू रक्षा सेना – “यह घटना हिन्दू एकता के रास्ते में हिमालय जैसी रुकावट”

 

राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि ने तीखी निंदा करते हुए कहा –

 

> “कथा कोई भी सुना सकता है – धर्म में जाति नहीं, श्रद्धा और सेवा देखी जाती है।

यह घटना अखंड भारत की भावना को चोट पहुँचाने वाली है। यह समाज में विष घोलने वाली प्रवृत्ति है।”

 

🔥 काली रक्षा सेना के आनंद स्वरूप – “कथा जाति नहीं, योग्यता से होती है”

 

लेकिन इस पूरे मामले में सबसे विवादित बयान स्वामी आनंद स्वरूप का आया। उन्होंने कहा –

 

> “धर्म का प्रचार करने के लिए जाति जरूरी नहीं। मैं स्वयं ब्राह्मण नहीं, फिर भी धर्म के लिए खड़ा हूँ। यादव समाज भी आत्मबल से उठकर धर्म की सेवा करे।”

संत समाज के कई वरिष्ठ जनों ने इस बयान को “अवांछित”, “आग में घी डालने जैसा” और “बंटवारे की लकीर खींचने वाला” कहा है।

 

📍 हरिद्वार निवासी यजमान बोले – ‘हम निर्दोष हैं’

जिस परिवार ने कथा का आयोजन किया, वह हरिद्वार का रहने वाला पंडित जयप्रकाश तिवारी है। उन्होंने कहा: “हमने कथावाचक को उनकी जाति से नहीं, उनके ज्ञान से पहचाना। कुछ असामाजिक तत्वों ने घटना को अंजाम दिया, जिन्हें अब सज़ा मिल रही है। हमारा कोई दोष नहीं था।”

 

👁️‍🗨️ वीडियो वायरल – सोशल मीडिया पर संत समाज की आवाज़ बुलंद

कथावाचकों की पिटाई, अपमान और चोटी काटने के वीडियो वायरल

SSP इटावा का बयान – “पीड़ित पक्ष के पक्ष में सबूत, जांच जारी”

“शंकराचार्य, प्रबोधानंद और आनंद स्वरूप के बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में”

 

 

 

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