March 10, 2026
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देवभूमि से वैश्विक चेतावनी: भारत की पवित्र नगरी हरिद्वार में पर्यावरण रक्षकों पर संकट, शिकायतकर्ता को जाना पड़ा जेल।

माफियाओं के दबाव में हरिद्वार की कार्यपालिका ही नहीं, न्यायपालिका भी न्याय देने में असमर्थ दिखाई दे रही है — स्वामी शिवानंद सरस्वती

हरिद्वार / नई दिल्ली | विशेष प्रदीप यदुवंशी 

उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के नूरपुर पंजनहेड़ी क्षेत्र में सामने आया आत्मरक्षा गोलीकांड अब एक स्थानीय विवाद से आगे बढ़कर पर्यावरण रक्षकों की सुरक्षा, प्रशासनिक निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर वैश्विक प्रश्न खड़े करने वाला मामला बन चुका है।

ऐसे समय में जब विश्व समुदाय जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंतन कर रहा है, हरिद्वार में पर्यावरण संरक्षण की शिकायत करने वाले लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई होना कानून व्यवस्था और पर्यावरण न्याय दोनों के लिए चिंताजनक संकेत माना जा रहा है।

विवाद की जड़

उषा टाउनशिप’ परियोजना और हरे-भरे बागों का कटान

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब हरिद्वार के पंजनहेड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित “उषा टाउनशिप” नामक आवासीय परियोजना के लिए कथित रूप से हरे-भरे बागों और पेड़ों के कटान की शिकायत सामने आई।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रसिद्ध मातृसदन आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस कटान को अवैध बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की इसके बाद जांच संभव हो पाई, जांच के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग का होना पाया गया।

इस संबंध में कई बार प्रशासन को शिकायतें दी गईं।

इसके बाद प्रशासन ने जांच के लिए संबंधित पक्षों को मौके पर बुलाया

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अतुल चौहान और उनके सहयोगी प्रशासन के बुलावे पर मौके पर पहुंचे।

आरोप है कि इसी दौरान जिन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी, उनके समर्थकों ने वहां मौजूद शिकायतकर्ताओं को घेर लिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

स्थिति गंभीर होने पर अतुल चौहान ने अपने लाइसेंसी हथियार से आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे कुछ लोग घायल हो गए।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित रूप से अतुल चौहान पर लाठी-डंडों से हमला होते हुए देखा जा सकता है। इसके बावजूद पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

कानूनी विवाद और प्रशासनिक प्रश्न

घटना के बाद अतुल चौहान ने अपना लाइसेंसी हथियार प्रशासन को सौंपते हुए आत्मसमर्पण किया।

मजिस्ट्रेटी जांच के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई पर मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने गंभीर सवाल उठाए।

> “यदि किसी व्यक्ति पर भीड़ हमला करती है और वह आत्मरक्षा में गोली चलाता है, तो उसे आरोपी बनाकर जेल भेजना न्याय की मूल भावना पर प्रश्न खड़े करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिक को जीवन और आत्मरक्षा का अधिकार देता है।”

स्वामी शिवानंद सरस्वती, संस्थापक, मातृसदन

मातृसदन: गंगा और पर्यावरण संरक्षण का आंदोलन

हरिद्वार स्थित मातृसदन आश्रम पिछले तीन दशकों से गंगा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के मुद्दों पर संघर्ष करता रहा है।

इस आश्रम के कई संत गंगा संरक्षण के लिए लंबे अनशन कर चुके हैं और कई साधुओं ने अपने प्राणों की आहुति भी दी है।

मातृसदन का कहना है कि उत्तराखंड में अवैध खनन, अवैध प्लॉटिंग और हरित क्षेत्र के विनाश के खिलाफ आवाज उठाने वालों को प्रशासनिक दबाव और मुकदमों के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

न्यायपालिका पर सवाल और अनशन

मामले ने एक नया मोड़ तब लिया जब मातृसदन से जुड़े ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने हरिद्वार के जिला जज के खिलाफ न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया।

यह अनशन कई दिनों से जारी है और उनकी प्रमुख मांग है कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय समीक्षा हो।

राजनीतिक साया और गंभीर आरोप

मामले में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों के वीडियो सामने आए।

इन वीडियो में आरोपियों ने पूरे घटनाक्रम के पीछे प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का नाम लिया।

वीडियो में आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली नेता और राजनीतिक पदाधिकारी इस पूरे विवाद में अप्रत्यक्ष भूमिका निभा रहे हैं, जिसके कारण प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करने में असफल रहा।

हालिया घटनाक्रम

9 मार्च को इस मामले में नया घटनाक्रम सामने आया जब कनखल थाना पुलिस ने फरार चल रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:

तरुण चौहान — भाजयुमो प्रदेश मंत्री

गौरव चौहान

अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी

बताया जाता है कि अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी एक स्थानीय बजरंग दल नेता के भाई हैं।

इन तीनों ने न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन हरिद्वार न्यायालय ने शनिवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और वारंट जारी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सोमवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही आरोपियों के परिजन और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कनखल थाने पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाए गए, हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पुलिस ने तीनों आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया।

अंतरराष्ट्रीय चिंता: पर्यावरण रक्षकों की सुरक्षा

कई अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है।

उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में तेजी से हो रही वन कटाई और अवैध निर्माण जलवायु संकट को और गहरा कर सकते हैं।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार यह मामला “Strategic Lawsuits Against Public Participation (SLAPP)” का उदाहरण हो सकता है, जिसमें जनहित में आवाज उठाने वालों को मुकदमों और दबाव के जरिए चुप कराने की कोशिश की जाती है।

मुख्य तथ्य (Investigation Matrix)

पैरामीटर सामने आई स्थिति

शिकायतकर्ता की स्थिति पर्यावरण कटान की शिकायत करने वाले ही आरोपी बने

कानूनी प्रश्न आत्मरक्षा के बावजूद गिरफ्तारी पर सवाल

प्रशासनिक भूमिका अवैध प्लॉटिंग रोकने में विफलता के आरोप

जन प्रतिक्रिया कनखल थाने में प्रदर्शन और विरोध।

तत्काल मांगें

इस मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने निम्न मांगें उठाई हैं:

1. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच

2. पर्यावरण रक्षकों और शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान की जाए

3. उषा टाउनशिप सहित कथित अवैध प्लॉटिंग की पर्यावरणीय जांच

4. न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा

निष्कर्ष

पंजनहेड़ी का यह प्रकरण अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है।

पर्यावरण संरक्षण, न्यायिक पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में यह मामला राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

यदि इस प्रकार पर्यावरण रक्षकों की आवाज को दबाया जाता है, तो यह केवल हरिद्वार या उत्तराखंड का नहीं बल्कि भारत की लोकतांत्रिक और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का भी गंभीर प्रश्न बन सकता है।

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