देवभूमि से उठी आवाज: ‘यादव जी की लव स्टोरी’ का हरिद्वार में विरोध, सेंसर बोर्ड और प्रशासन पर उठे सवाल।
यादव समाज ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन, फिल्म पर रोक और कानूनी कार्रवाई की मांग — कहा, समाज विशेष की छवि से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
हरिद्वार, 23 फरवरी
देवभूमि उत्तराखंड में भी अब फिल्म को लेकर विरोध तेज हो गया है। हरिद्वार में के पदाधिकारियों व समाज के लोगों ने एकजुट होकर एडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए फिल्म के ट्रेलर पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि फिल्म के ट्रेलर में यादव समाज की छवि, परम्पराओं और सामाजिक प्रतिष्ठा को भ्रामक व आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किये जाने की आशंका है, जिससे समाज में व्यापक नाराज़गी व्याप्त है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी चलचित्र के माध्यम से एक जाति विशेष को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है।
यादव समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विकास में समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सेना, कृषि, प्रशासन और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में समाज की भागीदारी को नज़रअंदाज़ कर उसे रूढ़िवादी या अपमानजनक ढंग से चित्रित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सेंसर बोर्ड की भूमिका पर उठे प्रश्न
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी फिल्म में समाज विशेष के खिलाफ विवादित सामग्री है, तो सेंसर बोर्ड को रिलीज से पहले गंभीरता से उसका परीक्षण करना चाहिए। ऐसे मामलों में अनुमति मिलना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में फिल्म के ट्रेलर पर रोक लगाने, निर्माताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और संवैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में महासभा के कई पदाधिकारी व समाज के सदस्य शामिल रहे, जिन्होंने कहा कि यह केवल एक समाज का नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक गरिमा का प्रश्न है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निगाह
फिलहाल प्रशासन की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विरोध के बाद अब देखना होगा कि क्या शासन फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा कर कोई कदम उठाता है या मामला आगे कानूनी प्रक्रिया में जाता है।





























































































































































































































































































