“उषा टाउनशिप में अवैध निर्माण पर मातृ सदन का प्रहार — प्रशासन से तुरंत सीलिंग और ध्वस्तीकरण की मांग”
“हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी! नूरपुर पंजनहेड़ी में जारी अवैध कब्जे पर मातृ सदन सख्त, कार्रवाई न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी”

हरिद्वार। ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, परगना ज्वालापुर में विकसित की जा रही तथाकथित “उषा टाउनशिप” में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर मातृ सदन ने कड़ा रुख अपनाया है। इस संबंध में मातृ सदन के अधिवक्ता ब्रह्मचारी सुधानंद द्वारा जिलाधिकारी हरिद्वार एवं हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) को विस्तृत पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 18 मार्च 2026 की प्रशासनिक रिपोर्ट और 11 मार्च 2026 को माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। HRDA की 83वीं बोर्ड बैठक में खसरा संख्या 154, 158M और 156M की भूमि के उपयोग परिवर्तन को दी गई स्वीकृति को उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा स्थगित किया जा चुका है, इसके बावजूद उसी आधार पर निर्माण कार्य होना पूरी तरह अवैध है।
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार जहां पूर्व में मात्र 0.8973 हेक्टेयर भूमि के लिए स्वीकृति दी गई थी, वहीं अब लगभग 2.9710 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया गया है। पूरे क्षेत्र में अवैध बाउंड्री वॉल का निर्माण कर इसे “उषा टाउनशिप” के नाम से प्रचारित किया जा रहा है, जिससे आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है। साथ ही टाउनशिप का मुख्य द्वार और उससे सटा भवन भी स्वीकृत क्षेत्र से बाहर निर्मित बताया गया है, जबकि HRDA अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया है कि यहां बनाए जा रहे भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं हैं।
मातृ सदन ने यह भी आरोप लगाया कि 18 मार्च 2026 को रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने इस पूरे प्रकरण पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक संरक्षण के चलते भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार ग्रामीण के पूर्व भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद और अमित चौहान की मिलीभगत के कारण प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
मातृ सदन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र को तत्काल सील किया जाए, सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाए, दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन इस मामले को पुनः न्यायालय के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होगा।















































































































































































































































































































