जूना अखाड़ा पत्तल बहिष्कार विवाद में संतों की चुप्पी, सवालों से बचते नजर आए आचार्य अवधेशानंद गिरी
नोमी डेरा धाम मंच पर मीडिया के सवालों से कन्नी काटते दिखे संत, पुराने निष्कासन प्रकरण और बढ़ते समर्थन ने बढ़ाई हलचल
उत्तराखंड: हरिद्वार के श्यामपुर गाजीवाली क्षेत्र में स्थित नोमी डेरा धाम का उद्घाटन कार्यक्रम भव्य और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, लेकिन इसी मंच से जुड़ा विवाद अब व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ सत्यव्रतानंद, राधा गिरी, साक्षी गिरी सहित कई संतों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। डेरा प्रमुख महंत रामवीर महाराज की भी मंच से सराहना की गई।
हालांकि, कार्यक्रम के दौरान माहौल उस वक्त बदल गया जब मीडिया ने जूना अखाड़े में चल रहे पत्तल बहिष्कार विवाद को लेकर सवाल उठाए। यह विवाद तब सामने आया था जब महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधनंद गिरि ने प्रेस वार्ता में हरी गिरी, मोहन भारती, प्रेम गिरी और नारायण गिरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनका पत्तल बहिष्कार घोषित किया था।
महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि जूना अखाड़ा।
बताया जाता है कि उसी प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी प्रबोधनंद गिरि ने यह भी आरोप लगाया था कि अखाड़े के कुछ फैसले राजनीतिक दबाव में लिए जा रहे हैं, जिसने इस विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
महामंडलेश्वर संजय गिरी।
इन सवालों पर संतों का रवैया टालमटोल भरा नजर आया। आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि “नारायण भाई–नारायण भाई” कहते हुए जवाब देने से बचते दिखे, जबकि अन्य संतों ने भी खुलकर प्रतिक्रिया देने से दूरी बनाए रखी। प्रेम गिरी महाराज पत्रकारों के सवाल पर माइकको झटकते हुए नजर आए और खुद को एक बाथरूम में बंद कर लिया, वहीं संजय गिरी ने इसे आश्रम का आंतरिक मामला बताते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया।
जूना अखाड़ा प्रेम गिरी।
घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर पत्रकारों ने नाराजगी जताते हुए संतों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे विवाद को और गंभीर बनाता है जूना अखाड़े से जुड़ा हालिया निष्कासन प्रकरण। आरएसएस से जुड़े बड़े संत के रूप में पहचाने जाने वाले महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि और उनके गुरु ब्रह्मंडलेश्वर स्वामी यातंद्रानंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि बाद में महामंडलेश्वर स्वामी यातंद्रानंद गिरि को पुनः अखाड़े में शामिल कर लिया गया, लेकिन इस फैसले ने पहले ही संत समाज के भीतर असंतोष की लहर पैदा कर दी थी।
बताया जा रहा है कि स्वामी प्रबोधानंद गिरि के समर्थन में बड़े स्तर पर संतों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। कई महात्मा उनके संपर्क में हैं और इसे अखाड़े के भीतर संभावित बदलाव की दिशा में एक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
ऐसे में अब पत्तल बहिष्कार विवाद, संतों की चुप्पी, राजनीतिक दबाव के आरोप और बढ़ते समर्थन के समीकरण ने जूना अखाड़े की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और आंतरिक संतुलन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है और संत समाज के साथ-साथ आमजन भी जूना अखाड़े की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।











































































































































































































































































































