मातृ सदन में घुसपैठ! साध्वी पद्मावती के कक्ष तक पहुँचा अज्ञात शख्स
अनशन के बीच सुनियोजित साजिश का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल।
देवभूमि हरिद्वार स्थित मातृ सदन आश्रम एक बार फिर सनसनीखेज और चिंताजनक घटना को लेकर सुर्खियों में है। 16 मार्च 2026 को सायं लगभग 4:45 से 5:15 बजे के बीच आश्रम परिसर में एक अज्ञात व्यक्ति दिनदहाड़े घुसकर सीधे साध्वी पद्मावती जी के कक्ष तक पहुँच गया।
हैरानी की बात यह रही कि वह व्यक्ति न केवल कक्ष के भीतर दाखिल हुआ, बल्कि साध्वी के सिरहाने तक पहुँच गया। हालांकि समय रहते साध्वी पद्मावती जी को उसकी उपस्थिति का आभास हुआ और उन्होंने शोर मचाकर मदद मांगी, जिसके बाद आश्रम के लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
संवेदनशील समय में सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब आश्रम में एक संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद द्वारा जिला जज नरेन्द्र दत्त के खिलाफ पिछले 24 दिनों से अनशन चल रहा है। वहीं आश्रम के प्रमुख संत ध्यान-साधना में लीन थे और अन्य जिम्मेदार लोग आश्रम में मौजूद नहीं थे।
ऐसे संवेदनशील माहौल में एक असहाय साध्वी, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उनके कक्ष तक किसी अज्ञात व्यक्ति का पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह पोल खोल द है।
मातृ सदन का आरोप — ‘यह सामान्य घटना नहीं, बड़ा षड्यंत्र’
मातृ सदन प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को साधारण नहीं बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र बताया है। आश्रम का आरोप है कि खनन माफिया, भू-माफिया, क्रशर माफिया और प्रशासन के कुछ भ्रष्ट तत्व मिलकर इस साजिश को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
आश्रम के अनुसार, उनका आंदोलन इन प्रभावशाली वर्गों को सीधे प्रभावित कर रहा है, जिसके चलते संतों को निशाना बनाने और आश्रम की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल
घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद न तो कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न ही पुलिस का उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचा।
यह सवाल खड़ा करता है कि —
क्या प्रशासन किसी बड़ी साजिश को नजरअंदाज कर रहा है?
या फिर प्रभावशाली तत्वों के दबाव में कार्रवाई से बच रहा है?
एफआईआर और उच्चस्तरीय जांच की मांग
मातृ सदन ने थाना कनखल में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग के साथ यह भी कहा है कि पकड़े गए व्यक्ति से गहन पूछताछ कर इस पूरे षड्यंत्र के पीछे के मास्टरमाइंड का खुलासा किया जाए।
साथ ही जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
स्पष्ट चेतावनी — जवाबदेही तय होगी
मातृ सदन ने साफ कहा है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों को जल्द सजा नहीं मिली, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होगी।






































































































































































































































































































