जूना अखाड़े पर फिर उठे सवाल, संत समाज में तेज हुई हलचल,,,महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि के गंभीर आरोपों के बाद हरिद्वार में चर्चा गरमाई, पंक्ति-पत्तल बहिष्कार का ऐलान
हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार में संत समाज और अखाड़ों की आंतरिक राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने प्रेस वार्ता कर जूना अखाड़े के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके पंक्ति-पत्तल बहिष्कार की घोषणा कर दी।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि हाल ही में उनके खिलाफ जूना अखाड़े से निष्कासन का जो दावा किया गया है, वह पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत है। उन्होंने बताया कि इस मामले में संबंधित पदाधिकारियों को अधिवक्ता के माध्यम से एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा नहीं ली और वर्ष 2007 में संत समाज द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2021 में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि द्वारा किए गए उनके अभिषेक को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े के चार व्यक्तियों — हरि गिरि, मोहन भारती, प्रेम गिरि और नारायण गिरि — पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को भविष्य में किसी धार्मिक आयोजन में आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने यह भी आरोप लगाया कि अखाड़े के भीतर कुछ लोग वर्चस्व की राजनीति के चलते संत समाज में विवाद पैदा कर रहे हैं और अखाड़ों की मर्यादा को ठेस पहुंचा रहे हैं।
गौरतलब है कि जूना अखाड़े को लेकर इससे पहले भी समय-समय पर आरोपों और विवादों के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार एक महामंडलेश्वर द्वारा खुलकर लगाए गए आरोपों ने संत समाज और धार्मिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
इस मामले में न्यूज़ हरिद्वार संवाददाता द्वारा अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज से भी बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से जूना अखाड़े के संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं और उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं।
हरि गिरि ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं महामंडलेश्वर प्रबोधानंद गिरि महाराज की गौशाला के लिए लगभग 50 लाख रुपये की धनराशि ऑनलाइन टीएमटी शेड निर्माण हेतु सहयोग स्वरूप दी थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल वे बाहर हैं और इस पूरे मामले पर बाद में विस्तार से प्रतिक्रिया देंगे।
इस घटनाक्रम के बाद हरिद्वार ही नहीं, बल्कि संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इस विवाद को लेकर संत समाज के भीतर कोई बड़ा निर्णय या नई स्थिति भी सामने आ सकती है।





































































































































































































































































































