March 13, 2026
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उत्तराखंड सदन में उठा 200 से अधिक पत्रकारों की मान्यता निरस्तीकरण का मामला, देशभर में चर्चा — चौथे स्तंभ पर सरकार का हमला: हल्द्वानी विधायक

मिथ्या एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आरोप, हल्द्वानी विधायक ने नियम-300 के तहत उठाया मुद्दा

देहरादून/हल्द्वानी।
उत्तराखंड में 200 से अधिक पत्रकारों की मान्यता निरस्त किए जाने का मामला अब उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनता जा रहा है। हल्द्वानी के विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए नियम-300 के तहत सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। सदन में मामला उठने के बाद पत्रकारिता जगत और विभिन्न संगठनों में भी इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

विधानसभा सचिव को 13 मार्च 2026 को भेजी गई सूचना में विधायक ने कहा कि सूचना विभाग द्वारा कथित रूप से मिथ्या एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर 200 से अधिक मान्यता प्राप्त पत्रकारों की मान्यता निरस्त कर दी गई है। साथ ही वर्ष 2026 के लिए उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जा रहा है। प्रभावित पत्रकारों में उधमसिंहनगर के 29 और नैनीताल जिले के 31 पत्रकार भी शामिल बताए गए हैं।

विधायक सुमित हृदयेश ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के खिलाफ साजिश करार देते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश पत्रकार पिछले 20 से 30 वर्षों से उत्तराखंड में वरिष्ठ और मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। सरकार के इस फैसले से पत्रकारों की छवि को गहरा आघात पहुंच रहा है और उनके सामने मान्यता के नवीनीकरण को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार विक्रमश्रीवास्तव से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पत्रकारों की मान्यता निरस्त किया जाना बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि इसे सरकार द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में ऐसा कभी नहीं हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकारों की मान्यता एक साथ समाप्त कर दी गई हो। इनमें से कई पत्रकार पिछले दो दशकों से स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को लेकर सूचना महानिदेशक और मुख्यमंत्री से भी वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह मामला बेहद गंभीर और जनहित से जुड़ा हुआ है।

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