February 20, 2026
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हरिद्वार में न्यायिक टिप्पणियों पर विवाद गहराया, मातृ सदन ने जिला जज नरेंद्र दत्त के खिलाफ भूख हड़ताल का किया ऐलान

 

संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती का आरोप — न्यायिक मर्यादा पर प्रश्न, तप और सत्याग्रह से होगा प्रतिकार

 

हरिद्वार। गंगा संरक्षण और पर्यावरणीय आंदोलनों के लिए विख्यात मातृ सदन ने अब न्यायपालिका को लेकर खुला मोर्चा खोल दिया है। संस्था के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जिला जज नरेंद्र दत्त को भेजे गए पत्र पर निर्धारित समय में संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में अविछिन्न आमरण अनशन और सत्याग्रह प्रारम्भ करने की घोषणा की है। इस घोषणा से हरिद्वार के प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

 

न्यायिक टिप्पणियों पर संस्थान का आक्रोश

मातृ सदन का आरोप है कि 18 फरवरी 2026 को अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियाँ संस्था और उसके संतों के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण तथा न्यायिक मर्यादा के प्रतिकूल हैं।

संस्था का कहना है कि आदेश में संतों के वेश, संस्था की निष्ठा और असंबद्ध व्यक्तियों के संदर्भ में की गई टिप्पणियाँ न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़े करती हैं।

 

संस्थान के अनुसार बिना पक्ष सुने टिप्पणियाँ करना, प्रशासनिक पत्रों को आदेश का हिस्सा बनाना और संस्था को अप्रत्यक्ष रूप से दोषी ठहराना न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

 

बाग़ कटान व कथित अवैध कॉलोनी से जुड़ा विवाद

पूरा विवाद कथित बाग व घने पेड़ों के कटान तथा अवैध कॉलोनी निर्माण की शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत के बाद दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया गया, जहां तनावपूर्ण स्थिति बनी।

आरोप है कि घटनाक्रम के दौरान मारपीट हुई और आत्मरक्षा में शिकायतकर्ता ने अतुल चौहान फायरिंग की फिर आत्मसमर्पण हालांकि पुलिस ने दोनों पक्षों पर मुकदमे दर्ज किए। अतुल चौहान न्यायिक हिरासत में है इसी प्रकरण से जुड़ी जमानत सुनवाई के दौरान न्यायालय की टिप्पणियों के बाद विवाद और तीखा हो गया।

प्रशासनिक जांच से बढ़ी हलचल

बुधवार को विवादित उषा टाउनशिप क्षेत्र की जांच के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुँची, जहाँ एडीएम, एसडीएम, भूलेख विभाग और पुलिस बल ने स्थल निरीक्षण व पैमाइश की कार्रवाई की।

करीब छह घंटे चली जांच के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण रही। मातृ सदन के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि उस व्यवस्था से है जहाँ पर्यावरण को क्षति पहुँचती हो।

न्यूज़ हरिद्वार की विशेष संवाददाता से बातचीत में ब्रह्मचारी सदानंद ने बताया कि प्रशासनिक टीम ने लगभग छह घंटे तक विस्तृत जांच की। उनके अनुसार जांच में कई अनियमितताएँ सामने आईं और लगभग 29,000 वर्ग फीट क्षेत्र सीमा से बाहर पाया गया।

 

उन्होंने कहा कि यद्यपि प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन बड़े पैमाने पर पेड़ कटान, अवैध प्लॉटिंग तथा निर्माण गतिविधियों के संकेत उषा टाउनशिप क्षेत्र में मिले हैं।

 

व्यवस्था आत्मबोध” के रूप में आंदोलन

संस्था ने अपने आंदोलन को “व्यवस्था आत्मबोध” बताते हुए तीन मांगें रखी हैं —

आदेश से आपत्तिजनक टिप्पणियाँ हटाई जाएँ

लिखित स्पष्टीकरण दिया जाए

सार्वजनिक क्षमा-याचना प्रस्तुत की जाए

इन मांगों की पूर्ति तक अविछिन्न आमरण सत्याग्रह जारी रखने की बात कही गई है।

 

व्यापक प्रभाव की संभावना

देवभूमि हरिद्वार में यह घटनाक्रम अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि प्रशासन, न्यायपालिका और सामाजिक चेतना के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। यदि सत्याग्रह लंबा चला तो इसका प्रभाव धार्मिक-सामाजिक विमर्श के साथ राजनीतिक हलकों तक भी पहुँच सकता है।

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