February 8, 2026
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अपराधी ही जब फरियादी बन जाएं, तो समझिए भ्रष्टाचार चरम पर है:स्वामी शिवानंद सरस्वती,,,,आत्मरक्षा में चलाई गोली, आत्मसमर्पण के बावजूद जेल—चारों स्तंभों पर गंभीर सवाल

जिन्हें जेल जाना चाहिए था, वही आज गिरफ्तारी की फरियाद लेकर एसपी सिटी पहुंचे: ब्रह्मचारी सुधानंद

हरिद्वार। पंजनहेड़ी प्रकरण में आत्मरक्षा में चलाई गई गोली को लेकर आज जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान, ग्राम प्रधान प्रदीप चौहान सहित कुछ प्रमुख लोग एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह से मिलने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कुछ लोग खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे उन्हें और उनके परिजनों को जान का खतरा है। इसी आधार पर उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कथित लाइसेंसी हथियारों के लाइसेंस निरस्त करने की मांग रखी।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर मातृसदन आश्रम ने तीखा विरोध दर्ज कराते हुए इसे साजिशन दबाव की राजनीति करार दिया है।

यह मामला अपराध नहीं, समाज और पर्यावरण हित में खड़े लोगों को डराने की कोशिश— स्वामी शिवानंद सरस्वती

मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि यह मामला किसी आपराधिक घटना का नहीं, बल्कि सरकारी भूमि, पर्यावरण और समाजहित के पक्ष में खड़े लोगों को दबाने की कोशिश से जुड़ा है।
उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि पहले अवैध रूप से पेड़ों का कटान किया गया, फिर सरकारी भूमि पर कब्जा कर उसे “उषा टाउनशिप” के नाम से कॉलोनी में तब्दील कर दिया गया। जब इन अवैध गतिविधियों का विरोध हुआ, तो दबंगों ने प्रशासन के सामने ही हमला किया।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति आत्मरक्षा में गोली चलाने को मजबूर होता है, तो उसे अपराधी बना देना शासन, प्रशासन और न्यायपालिका—तीनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आत्मरक्षा में गोली चलाने वाला व्यक्ति आज भी जेल में है, जबकि हाल ही में मातृसदन से जुड़े ब्रह्मचारी सुधानंद को न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

शिष्य ब्रह्मचारी सुधानंद के पक्ष में हरिद्वार न्यायालय में गरजे स्वामी शिवानंद सरस्वती

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि जिस दिन ब्रह्मचारी सुधानंद की अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई, उस दिन वे स्वयं हरिद्वार न्यायालय में मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्वामी शिवानंद सरस्वती ने निर्भीक होकर अपने शिष्य के पक्ष में मजबूती से न्यायालय में पक्ष रखा, जिसके बाद अग्रिम जमानत स्वीकार की गई।

मातृसदन का आरोप है कि आज जो लोग प्रशासन से गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वे असल मुद्दों—अवैध कब्जा, पर्यावरण विनाश और सरकारी भूमि की लूट—से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं मानो “उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा हो।”

मातृसदन : तीन दशकों से भूखे पेट गंगा और पर्यावरण की लड़ाई

मातृसदन केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि पिछले तीन दशकों से गंगा संरक्षण और पर्यावरण रक्षा का जीवित आंदोलन है।
यह वह संस्था है जिसने भूखे पेट संघर्ष किया, अपने शिष्यों के बलिदान दिए, लेकिन सत्य और प्रकृति के पक्ष से कभी समझौता नहीं किया।

मातृसदन के ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लगातार नए खुलासे सामने रखे जा रहे हैं।
आश्रम में लगातार अनशन जारी है और आज अनशन का आठवां दिन है।
गंगा और पर्यावरण संरक्षण के लिए ब्रह्मचारी आत्मदानंद, गुरु आदेश के पालन में, आठवें दिन भी अनशन पर बैठे हुए हैं, जबकि ब्रह्मचारी सुधानंद कानूनी व्यवस्थाओं के साथ-साथ आश्रम का संचालन संभाल रहे हैं।

इस दौरान न्यूज़ हरिद्वार द्वारा ब्रह्मचारी आत्मदानंद से बातचीत की गई। उन्होंने कहा—

“आप मेरी चिंता मत कीजिए, समाज की चिंता कीजिए, शासन-प्रशासन की चिंता कीजिए और मां गंगा की चिंता कीजिए।”

उनका यह उत्तर कहीं न कहीं समाज को आत्मबोध, आत्ममंथन और आत्मयात्रा के लिए प्रेरित करता है।

जनता की आवाज़ | “सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”

हरिद्वार से बहादुर चंद मेहंदी रत्ता का कहना है—

“मातृसदन सदैव सत्य के साथ रहा है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। लगभग 30 वर्षों से मैं देख रहा हूं कि गंगा की लड़ाई मातृसदन ने न केवल लड़ी है, बल्कि समाज को दिशा भी दी है।”

“मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती वास्तव में कलयुग के दौर में पूजनीय व्यक्तित्व हैं। मेरा उन्हें साधुवाद है और मेरा समर्थन मातृसदन के साथ है।”

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम से हरिद्वार जनपद में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलचल तेज़ हो गई है, और मातृसदन एक बार फिर न्याय, आत्मरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के सवाल पर निर्णायक संघर्ष के केंद्र में खड़ा दिखाई दे रहा है

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