हरिद्वार में मातृ सदन ने उठाया एक और तूफान जिला जज के खिलाफ भूख हड़ताल।
अवैध कटान-फायरिंग विवाद से शुरू हुआ मामला, अब हाईकोर्ट पहुँची जज के खिलाफ शिकायत
हरिद्वार। हरिद्वार का एक विवादित घटनाक्रम अब राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अवैध बाग कटान, प्लाटिंग और विकास कार्यों के विरोध से शुरू हुआ मामला शिकायतकर्ताओं पर हमले, आत्मरक्षा में चली गोली, आत्मसमर्पण, जेल भेजे जाने और अब न्यायिक आदेश पर उठे सवालों तक पहुँच गया है।
गंगा संरक्षण आंदोलनों के लिए चर्चित संस्था मातृ सदन ने इस पूरे प्रकरण को न्यायिक निष्पक्षता से जोड़ते हुए हरिद्वार के जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त के आचरण की शिकायत औपचारिक रूप से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व प्रशासनिक न्यायाधीश को भेजी है और कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद
बताया जा रहा है कि अवैध कटान और प्लाटिंग के विरोध में शिकायत करने वाले लोगों पर हमला हुआ, जिसके बाद आत्मरक्षा में लाइसेंसी हथियार से गोली चलने की घटना सामने आई। बाद में आत्मसमर्पण हुआ और आरोपियों को मजिस्ट्रेट पेशी के बाद जेल भेज दिया गया।
मातृ सदन का सवाल है कि यदि गोली आत्मरक्षा में चली, तो क्या इसे अपराध माना जाना चाहिए — इसी बिंदु ने पूरे विवाद को कानूनी बहस का रूप दे दिया।
मातृ सदन संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती।
जमानत आदेश बना टकराव की जड़
संस्था के अनुसार विवाद की मुख्य वजह 18 फरवरी 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश है, जो उत्तराखंड बनाम अभिषेक व अन्य मामले में दिया गया।
मातृ सदन का आरोप है कि जिस मामले का संस्था से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था, उस आदेश में संस्था और संतों के संदर्भ में व्यक्तिगत टिप्पणियाँ दर्ज की गईं और ब्लैकमेलिंग व दुर्भावना जैसे आरोप लगाए गए, जो न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।
संस्था का कहना है कि आदेश के कुछ अनुच्छेद बिना पर्याप्त विचार के लिखे गए प्रतीत होते हैं और इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट में औपचारिक शिकायत
इसी आधार पर संस्था ने पूरा मामला उच्च न्यायालय तक पहुँचाते हुए जिला जज के आचरण की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आदेश को न्यायिक मानकों के विपरीत बताते हुए जांच और हस्तक्षेप की मांग की गई है।
प्रेस वार्ता में आंदोलन का ऐलान
संस्था के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने प्रेस वार्ता में कहा कि न्यायिक टिप्पणियों ने संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था पर प्रश्न खड़े किए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा और संत समाज को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
संस्था के अनुसार ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं और आमरण अनशन की घोषणा कर दी गई है।
जनआंदोलन बनाम न्यायपालिका की बहस
हाईकोर्ट में शिकायत और अनशन शुरू होने के बाद हरिद्वार में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। इसे अब पर्यावरण आंदोलन, कानून व्यवस्था और न्यायिक आचरण से जुड़ा बड़ा प्रकरण माना जा रहा है।




























































































































































































































































































