February 18, 2026
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हरिद्वार में मातृ सदन का न्यायपालिका पर प्रहार, जिला जज की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

आपत्ति-पत्र भेज 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

आत्मरक्षा गोलीकांड, जमानत प्रक्रिया और न्यायिक टिप्पणियों पर उठे सवाल 

धर्मनगरी स्थित में बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संस्थापक ने जिला न्यायपालिका की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि हाल ही में अग्रिम जमानत प्रकरण की सुनवाई के दौरान की गई न्यायिक टिप्पणियाँ न्यायिक मर्यादा, निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध प्रतीत होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दे मामले के तथ्यों से असंबंधित थे, जिससे न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।

उन्होंने बताया कि मातृ सदन की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश को औपचारिक आपत्ति-पत्र भेजकर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो संस्था न्यायिक जवाबदेही की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।

प्रेस वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने व्यापक संदर्भ देते हुए कहा कि देश में संविधान और नागरिकों के मूल अधिकारों पर संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार में माफियाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, जिसके चलते को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, पेड़ों की कटाई हो रही है तथा खेती और सरकारी भूमि पर खुलेआम प्लाटिंग की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है, जो व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को दर्शाती है। आत्मरक्षा में चलाई गई गोली को अपराध न मानते हुए उन्होंने कहा कि इसी प्रकरण को लेकर यह प्रेस वार्ता आयोजित की गई है।

प्रकरण के संबंध में बताया गया कि शिकायतकर्ता अमित चौहान और उनके साथियों ने प्रशासन को घटना की सूचना दी थी। मौके पर पहुंचे दोनों पक्षों के बीच विवाद के बाद गोली चलने की घटना सामने आई। पुलिस ने दोनों पक्षों पर क्रॉस मुकदमा दर्ज किया और लगभग छह लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें मातृ सदन के ब्रह्मचारी सदानंद भी शामिल थे। सदानंद को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों को उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी गई है।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन या उच्च न्यायिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे स्वयं जिला जज के विरुद्ध अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था की शुचिता और जनविश्वास की रक्षा का संघर्ष बताया।

प्रेस वार्ता के दौरान मातृ सदन से जुड़े संतों और समर्थकों ने भी न्यायिक पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद शहर में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, तो उसी आधार पर अन्य आरोपियों को भी राहत मिलनी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में समानता दिखाई दे और जनता का विश्वास बना रहे।

अब देखना होगा कि न्यायपालिका इस संवेदनशील मामले को किस प्रकार लेती है और आरोपों पर कोई संज्ञान लिया जाता है या नहीं।

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