आत्मरक्षा गोलीकांड से जुड़ा भूमि घोटाला: प्रशासन झुका, मातृ सदन का 10 दिवसीय अनशन समाप्त
हरे-भरे बाग कटान, अवैध कॉलोनी और उषा टाउनशिप प्रकरण में जांच समिति गठित
हरिद्वार।
जगजीतपुर स्थित मातृ सदन आश्रम में ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद का 10 दिनों से चल रहा अविछिन्न आमरण अनशन सोमवार रात करीब 8:40 बजे समाप्त हो गया। प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे चली वार्ता के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के आदेश पर उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल की गई।
उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, सीओ सिटी सहित अन्य अधिकारी मातृ सदन आश्रम पहुंचे, जहां लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बाद अनशन समाप्त कराया गया।
हरे-भरे बाग कटान और अवैध कॉलोनी से जुड़ा है पूरा मामला
दरअसल, पूरा मामला हरे-भरे आम के बागों के अवैध कटान, सरकारी भूमि पर उषा टाउनशिप विकसित किए जाने और अवैध कॉलोनी निर्माण की शिकायतों से जुड़ा है।
इस संबंध में अतुल चौहान और उनके साथियों द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में मातृ सदन के अधिवक्ता ब्रह्मचारी सदानंद भी सक्रिय रूप से शिकायतकर्ता के रूप में शामिल थे।
उषा टाउनशिप पहुंचने पर हमला, आत्मरक्षा में चली गोली
शिकायत पर प्रशासन के बुलावे पर जब अतुल चौहान, अधिवक्ता ब्रह्मचारी सदानंद और अन्य लोग उषा टाउनशिप पहुंचे, तभी कुछ हमलावरों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
इस हमले के दौरान अतुल चौहान ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिसमें दो लोग घायल हो गए।
अतुल चौहान जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान के परिजन बताए गए हैं।
घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों पर क्रॉस मुकदमा दर्ज किया। अतुल चौहान ने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद मजिस्ट्रेटी जांच के उपरांत उन्हें न्यायालय भेज दिया गया।
गोलीकांड और कार्रवाई के विरोध में शुरू हुआ आमरण अनशन
इसी कार्रवाई को लेकर मातृ सदन ने इसे एकतरफा पुलिस कार्रवाई बताते हुए विरोध जताया।
ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद आमरण अनशन पर बैठ गए। अनशन के दौरान लगातार प्रशासन पर निष्पक्ष जांच और भूमि घोटाले में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की जाती रही।
व्हाट्सएप ग्रुप में दस्तावेज सार्वजनिक, बढ़ा दबाव
अनशन के दसवें दिन मातृ सदन के व्हाट्सएप ग्रुप में एसएसपी हरिद्वार प्रमेंद्र डोभाल, उनकी पत्नी और परिवार से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए गए।
इसके बाद अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों पर सूचनाएं साझा होते ही मातृ सदन में लोगों का लगातार आगमन शुरू हो गया।
अतुल चौहान, उनकी पत्नी और परिवार के सदस्य भी मातृ सदन पहुंचे।
प्रशासन झुका, उच्चस्तरीय जांच समिति गठित
भूमि उपयोग और कॉलोनी विकास से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), हरिद्वार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है।
जांच समिति में शामिल—
- अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), हरिद्वार – अध्यक्ष
- उप जिलाधिकारी, हरिद्वार
- अधिशासी अभियंता (हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण)
- राजस्व निरीक्षक विजेंद्र गिरी
- अजय कपिल
- राजस्व उप निरीक्षक हरेंद्र यादव
- पंकज कुमार
जिलाधिकारी ने समिति को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही जांच समिति में मातृ सदन से भी एक सदस्य को शामिल किए जाने पर सहमति बनी है।
मातृ सदन और संत समाज की प्रतिक्रिया
मातृ सदन के अधिवक्ता ब्रह्मचारी सदानंद ने कहा कि प्रशासन ने उनकी शर्तों को स्वीकार किया है और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सराहनीय कार्य किया है।
वहीं मातृ सदन के संस्थापक गुरुदेव स्वामी शिवानंद सरस्वती ने भी जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के इस निर्णय और आदेशों की खुलकर सराहना की है।
अनशन समाप्त होने के बाद स्थानीय लोगों और संत समाज ने इसे प्रशासनिक दबाव और जनआंदोलन की जीत बताया है।



















































































































































































































































































