हरिद्वार आत्मरक्षा गोलीकांड: अधिवक्ता ब्रह्मचारी सुधानंद को अग्रिम जमानत
मातृ सदन में अनशन जारी, धर्म संसद अध्यक्ष ने न्यायालय के फैसले को बताया सत्य की जीत
हरिद्वार।
नूरपुर पंजनहेड़ी फायरिंग प्रकरण में मातृ सदन से जुड़े अधिवक्ता ब्रह्मचारी सुधानंद को बड़ी राहत मिली है। तृतीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हरिद्वार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने गिरफ्तारी से पूर्व जमानत को उपयुक्त मानते हुए यह आदेश पारित किया। ब्रह्मचारी सुधानंद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया। अभियुक्त की ओर से एडवोकेट अरुण भदौरिया एवं एडवोकेट उत्तम सिंह चौहान ने पैरवी की। इस दौरान मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती भी न्यायालय में उपस्थित रहे।
यहमामला 27 जनवरी को नूरपुर पंजनहेड़ी गांव में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान उत्पन्न तनाव से जुड़ा है, जहां दो पक्षों के बीच फायरिंग की घटना हुई थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज किए हैं। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान की ओर से ब्रह्मचारी सुधानंद के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया, जबकि फायरिंग में घायल सचिन चौहान और कृष्णपाल का उपचार चल रहा है। पुलिस ने इस प्रकरण में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी केस दर्ज किए हैं। इसी घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी सार्वजनिक चर्चा में है कि क्या आत्मरक्षा की स्थिति में किया गया प्रतिकार आपराधिक श्रेणी में आता है या नहीं।,

इधर मामले को लेकर मातृ सदन में संतों का विरोध जारी है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का आमरण अनशन लगातार चल रहा है। संत समाज का आरोप है कि पूरे प्रकरण में आत्मरक्षा के पहलू की अनदेखी की गई और राजनीतिक प्रभाव के चलते एकतरफा कार्रवाई हुई। मातृ सदन की ओर से समय-समय पर तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने का दावा भी किया जा रहा है।

अग्रिमजमानत के आदेश पर धर्म संसद के अध्यक्ष वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा को अपराध के रूप में प्रस्तुत करना न्यायसंगत नहीं है और यह आदेश सत्य के पक्ष में आया है। उनका कहना है कि मातृ सदन लंबे समय से गंगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता रहा है और न्यायालय का यह निर्णय उसी संघर्ष को मजबूती देता है।
अग्रिम जमानत के बाद जहां एक ओर मातृ सदन और संत समाज ने इसे न्याय की दिशा में कदम बताया है, वहीं मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल पूरे प्रकरण में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।



















































































































































































































































































