पंचतत्वों में विलीन हुए बड़ा अखाड़ा उदासीन के वयोवृद्ध संत महंत निरंजन दास
हरिद्वार के संत समाज के लिए शोकपूर्ण समाचार है। बड़ा अखाड़ा उदासीन, बादशाहपुर अखाड़ा शाखा के मुकामी महंत श्री निरंजन दास (चौधरी जी) पंचतत्वों में विलीन हो गए। बीती रात लगभग दो बजे उन्होंने 80 वर्ष की आयु में अपनी अंतिम सांस ली।
आज कनखल स्थित बड़ा अखाड़ा उदासीन परिसर में संत परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अखाड़े के संतों ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान पूरा वातावरण शोक और श्रद्धा से सराबोर रहा।
महंत निरंजन दास उदासीन अखाड़े के वयोवृद्ध और सम्मानित संतों में गिने जाते थे। संत समाज में उनकी सादगी, तपस्या और अनुशासित जीवनशैली को विशेष आदर के साथ देखा जाता था। उनका संपूर्ण जीवन अखाड़ा परंपरा, साधना और सेवा को समर्पित रहा।
अंतिम यात्रा के अवसर पर महंत कमल दास, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद, उदासीन अखाड़ा के कोठारी राघवेंद्र दास, सूर्यांश मुनि, महंत महेश मुनि महाराज सहित खड़ दर्शन समाज के अनेक संत-महंत उपस्थित रहे और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


















































































































































































































































































