हरिद्वार जनपद की सबसे ऊची 108 फीट शेरावाली आश्रम पर फिर घमासान,व्यापारीकरण, जमीन सौदेबाज़ी, कब्जे के आरोप… ग्रामीणों का उबाल तेज
**सती गिरी बोलीं—“सारे विवाद निपटा दिए हैं”वहीं पीड़ित विशाल ने लगाए धमकी और अवैध कब्जे के गंभीर आरोप**
हरिद्वार/श्यामपुर–कांगड़ी
श्यामपुर–कांगड़ी में स्थित 108 फीट ऊंचा शेरावाली आश्रम पिछले कई वर्षों से विवादों के केंद्र में है। आश्रम की जमीन पर व्यापारीकरण, होटल–प्लॉट निर्माण, अवैध कब्जा, अधूरे अनुबंध और आस्था पर चोट जैसे गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि “यह जगह सिर्फ जमीन नहीं—कांगड़ी की पहचान, इतिहास और आध्यात्मिक केंद्र है।” दारा सिंह जैसे लोग यहां पर महीना साधना कर चुके है
1994 में गोयल ने बनाई थी मूर्ति, दानपत्र में साफ शर्त—‘व्यापारीकरण नहीं होगा’
ग्राम समाज के अनुसार, 1994 में गांव के लोगों ने यह जमीन दानपत्र के माध्यम से दिल्ली के व्यापारी गोयल को दी थी।

दानपत्र में यह साफ उल्लेख था कि—
> “भूमि का किसी प्रकार का व्यापारीकरण नहीं होगा, यह आस्था का केंद्र रहेगा।”
गोयल ने इसी जमीन पर 108 फीट ऊंची शेरावाली मूर्ति और आश्रम की स्थापना कराई। ग्रामीण आज भी मानते हैं कि यह मूर्ति हरिद्वार जिले में सबसे ऊंची दुर्गा मूर्ति है—जो हर की पौड़ी की 100 फुट शिव मूर्ति से भी बड़ी है।
गोयल और जोशी—दोनों की मौतें भी विवाद की जड़ में
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि जब-जब आश्रम को बेचने का प्रयास हुआ, संबंधित लोग संकटों में घिरते चले गए।
गोयल जब आश्रम बेचना चाहते थे, वे कानूनी विवादों में उलझ गए और उसी समय उनकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद आश्रम जोशी जी ने खरीदा, जिन्हें लोग बताते हैं कि उन्होंने यह आश्रम अम्मा आनंदमई गमन के पैसों से खरीदा था।
बाद में कथित तौर पर बेचने की पहल होते ही वे भी कानूनी तनाव और असामान्य परिस्थितियों में फंसकर हृदयाघात के कारण चल बसे।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह घटनाएँ “सिर्फ संयोग नहीं”—आश्रम को बेचने की कोशिश करने वालों को अदृश्य बाधाएँ घेर लेती हैं।
पत्रकारीय जांच इन दावों की पुष्टि नहीं करती, लेकिन ग्रामीणों में यह विश्वास गहरा है।
सती गिरी के पास आया आश्रम—टुकड़ों में बिक्री और होटल निर्माण का आरोप,क्षेत्रवासियों का कहना है जब विदेशी महिला के धन से यह आश्रम खरीदा गया तो फर इसका व्यापरीकरण आखिर क्यों

गोयल और जोशी के बाद यह आश्रम महामंडलेश्वर सती गिरी के पास आया।
और विवाद यहीं से तेज हुए।
ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि—आश्रम की जमीन को कई हिस्सों में बांटकर बेचा जा रहा है ,
आश्रम मैं चार मंजिला होटल निर्माण हो चुका है और शेरावाली की प्रतिमा चार मंजिला इमारत के कारण छुप गई है,
और अब मूर्ति हटाए जाने की चर्चा भी गांव में फैल रही है।ग्रामीणों के लिए यह सबसे बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन गया है।
विशाल का आरोप—“हमारी जमीन कब्जा कर बेची जा रही है; 2016 का अनुबंध अधूरा”
कांगड़ी निवासी विशाल ने सबसे गंभीर आरोप लगाए हैं।विशाल का दावा:
“2016 में मेरा सती गिरी से अनुबंध हुआ था। मुझे 20 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। आज तक एक रुपया नहीं मिला।”“हमारी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। हाईवे की ओर का हिस्सा भी सौदे में बेचा जा रहा है।”“आश्रम का असली प्रवेश गली नंबर 4 में था। हाईवे की तरफ कोई निकासी नहीं थी। हमारी जमीन को जबरन मिलाया और कब्जा किया गया।”“हमें धमकाया जा रहा है… हमारी जमीन बचाओ, निष्पक्ष जांच करो।”उनकी यह बाइट ग्रामीणों के आक्रोश का केंद्र बन चुकी है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल—“आश्रम बचाओ या आश्रम बेचो?”गांव के लोग स्पष्ट कह रहे हैं—
“हमें आश्रम से कोई विरोध नहीं… व्यापारीकरण से है।”“आश्रम किसी साधु, महंत, ट्रस्ट—जिसके पास रहे—आस्था का केंद्र बना रहना चाहिए।”“टुकड़ों में प्लॉट–होटल बनाने से हमारी पहचान खतरे में है।”
“जब महामंडलेश्वर ही जमीनें बेचने लगें, तो धर्म की मर्यादा कौन बचाए?”कई ग्रामीण लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। “आश्रम बचाओ” अभियान तूल पकड़ रहा है।
बाइट — महामंडलेश्वर सती गिरी
1994 का मूल दानपत्र,गोयल और जोशी से जुड़े सभी लेनदेन,2016 का अनुबंध,और हाईवे किनारे की हर बिक्री निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण है, और गांव से लेकर हाईवे तक लोग लगातार पहरा दे रहे हैं।
108 फीट शेरावाली आश्रम का विवाद अब केवल जमीन का मुद्दा नहीं रहा—यह आस्था, परंपरा, कानूनी लड़ाई और ग्रामीण असंतोष का बड़ा विषय बन गया है।


















































































































































































































































































