गाजीवाली में गंगा घाट पर विवाद — क्षेत्रीय युवकों और प्रॉपर्टी मालिकों में तनातनी, गंगा में अतिक्रमण का आरोप
गंगा घाट पर नहाने से रोके गए युवक, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल — ग्राम प्रधान पर मिलीभगत के आरोप, मातृसदन और संत समाज ने दी चेतावनी
हरिद्वार, के श्यामपुर क्षेत्र स्थित कांगड़ी गाजीवाली गांव में रविवार दोपहर गंगा घाट पर बड़ा विवाद देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के स्थानीय युवा दोपहर लगभग 12 बजे गंगा स्नान के लिए घाट पहुंचे थे।
इसी दौरान कुछ प्रॉपर्टी मालिकों के बाउंसरों और बॉडीगार्डों ने युवकों को गंगा में नहाने से रोक दिया।
इस पर युवकों ने विरोध जताया और घाट पर चल रहे अवैध अतिक्रमण व निर्माण कार्यों का मुद्दा उठाया।
विरोध के बीच दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
युवकों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस घाट पर गंगा स्नान करते आ रहे हैं,
लेकिन अब कुछ लोगों ने गंगा में पैचिंग कर कब्जा जमाने का प्रयास शुरू कर दिया है।
युवकों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान की मिलीभगत से यह कब्जा कराया जा रहा है।
उनका कहना है कि गंगा घाट का यह क्षेत्र सार्वजनिक आस्था स्थल है,
जहाँ किसी को निजी स्वामित्व का अधिकार नहीं है।
घटनास्थल पर पहुंचे क्षेत्रीय वरिष्ठ पत्रकार ने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया,
लेकिन मौके पर मौजूद रसूखदारों ने पत्रकारों से भी अभद्रता की।
स्थानीय युवकों ने इस रवैये को “आस्था पर हमला” बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल — जनता में रोष और प्रतिक्रियाएँ
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है,
जहाँ लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ और नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं।
कई लोगों ने लिखा —
> “गंगा घाट किसी की जागीर नहीं, यह सबकी आस्था का स्थल है।”
वहीं कुछ यूज़र्स ने प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
वीडियो में युवकों को नहाने से रोके जाने और बहस के दृश्य साफ देखे जा सकते हैं।
🕉️ मातृसदन ने जताई चिंता — संत समाज ने किया समर्थन

इस पूरे घटनाक्रम पर मातृसदन के ब्रह्मचारी अधिवक्ता शुद्धानंद ने कहा
“एनजीटी के नियमों के अनुसार गंगा से 200 फीट तक किसी भी तरह का निर्माण या अतिक्रमण वर्जित है।
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा को ‘लिविंग रिवर’ यानी जीवित नदी का दर्जा दिया है,
लेकिन आज भी हरिद्वार में कई स्थानों पर सीवर लाइनें गंगा में छोड़ी जा रही हैं।
यदि सरकार ने जल्द सख्त कार्रवाई नहीं की, तो मातृसदन आंदोलन करने को बाध्य होगा।”
गाजीवाली और कांगड़ी घाट पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ संत समाज ने भी मुखर समर्थन जताया है।
महामंडलेश्वर स्वामी प्रमोदानंद गिरी, महंत माता श्रद्धानाथ और अन्य संतों ने कहा —
> “गंगा केवल नदी नहीं, यह सनातन धर्म की आत्मा है।
जो भी उसके तट या प्रवाह पर कब्जा करता है, वह हमारी आस्था की जड़ों पर प्रहार करता है।
हम हर गाजीवाली निवासी के साथ खड़े हैं और मातृसदन के संघर्ष में सहभागी हैं।”
श्यामपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई — मॉनिटरिंग जारी
हालांकि, मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए श्यामपुर थाना प्रभारी मनोज शर्मा ने पुलिस बल मौके पर भेजा और स्थिति को शांत कराया। मौके पर ग्राम प्रधान नेगी मौजूद रहे। पुलिस के साथ मिलकर दोनों पक्षों को समझाकर विवाद को फिलहाल नियंत्रित कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस पूरे मामले की मॉनिटरिंग लगातार कर रही है।
इसके बावजूद, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मुद्दे पर शासन को सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए
और प्रशासन को गंगा घाट की सुरक्षा व अतिक्रमण रोकने के ठोस निर्देश देने चाहिए।
लोगों ने चेताया है कि गंगा घाट की पवित्रता और स्वाभाविक प्रवाह की रक्षा के लिए अब सख्त कदम जरूरी हैं।
⚖️ स्थानीयों की चेतावनी — जल्द कार्रवाई न हुई तो सत्याग्रह
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गंगा घाट पर हो रहे अवैध निर्माणों की जांच की जाए,
अन्यथा वे गंगा बचाओ समिति और मातृसदन के साथ मिलकर सत्याग्रह या धरना शुरू करेंगे।


















































































































































































































































































