मां गंगा की पुकार पर संत समाज एकजुट — शासन-प्रशासन को खुली चुनौती, बोले अब और अपमान नहीं सहेंगे!
संत समाज बोला: “गंगा घाट पर बीयर बार नहीं, तपोभूमि चाहिए”
आमात्रा रिजॉर्ट विवाद ने खोली शासन की लापरवाही — सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक की उड़ाई जा रही धज्जियां
हरिद्वार।
देवभूमि हरिद्वार में मां गंगा की पवित्रता पर संकट गहराता जा रहा है।श्यामपुर कांगड़ी क्षेत्र में गंगा तट से कुछ ही मीटर दूरी पर स्थित आमात्रा रिजॉर्ट में बीयर बार और नॉनवेज सेंटर संचालित होने की खबरों ने संत समाज को झकझोर दिया है।अब यह मामला केवल धार्मिक भावनाओं का नहीं, बल्कि संविधान, न्याय और शासन की जवाबदेही का प्रतीक बन गया है।
मातृसदन संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती का तीखा बयान
मातृसदन आश्रम के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा —
> “शासन-प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत के चलते मां गंगा का अतिक्रमण हो रहा है। अब तो सनातन के नाम पर सरकारें केंद्र से लेकर प्रदेश में हैं, फिर भी गंगा की रक्षा नहीं हो पा रही — इसका अर्थ साफ है कि कथनी और करनी में फर्क है। आमात्रा रिसोर्ट को तुरंत बंद करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने गंगा की सुरक्षा और तट से 200 मीटर क्षेत्र में किसी भी व्यावसायिक गतिविधि पर रोक लगाई है, लेकिन हरिद्वार में यह आदेश ध्वस्त हो चुके हैं।
> “प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है, बिना मिलीभगत के यह संभव ही नहीं कि गंगा किनारे ऐसे अवैध निर्माण और बार चलें।”
अखाड़ा परिषद प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने दी चेतावनी
बाबा हठयोगी, अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता ने कहा —
> “जो भी मां गंगा को दूषित करेगा, उसे कठोर दंड मिलेगा। गंगा हमारी जननी हैं, उनके तट पर बीयर बार और नॉनवेज सेंटर चलाना सनातन संस्कृति का अपमान है।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी महात्मा मातृसदन स्वामी शिवानंद सरस्वती के साथ खड़े हैं , और कहा —
“मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती पिछले ढाई दशकों से गंगा संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके निष्पक्ष दृष्टिकोण और सतत प्रयासों के कारण अभी तक जनपद में गंगा मा बहुत हद तक संरक्षित रही है। उनके साथ सभी महात्मा और संगठनों के संत एकजुट हैं।”
संत समाज ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि जल्द ही धर्म संसद की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें गंगा संरक्षण और अतिक्रमण विरोधी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
> “महात्माओं ने संकल्प लिया है — मां गंगा को शुद्ध और संरक्षित रखने के लिए कोई भी बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगे।”
मातृसदन से अधिवक्ता ब्रह्मचारी सुधानंद का बयान
मातृसदन से अधिवक्ता ब्रह्मचारी सदानंद ने कहा —
> “मां गंगा को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि लिविंग एलिमेंट (जीवित इकाई) के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों को सख्ती से लागू करना अब शासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।”
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की हो रही अवहेलना
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट (2017) और उत्तराखंड हाई कोर्ट (2018) दोनों ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि — “गंगा और यमुना को जीवित इकाई (Living Entity) का दर्जा दिया जाए, और इनके तट से 200 मीटर की सीमा के भीतर कोई भी व्यावसायिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए।”
फिर भी हरिद्वार में आमात्रा रिजॉर्ट जैसे कई प्रतिष्ठान खुलेआम इन आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।न तो स्थानीय पुलिस कार्रवाई कर रही है, न ही हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) या नगर निगम कोई जवाबदेही ले रहा है।
संत समाज ने सवाल उठाया है —
> “क्या केंद्र से लेकर देहरादून तक शासन की आंखें बंद हैं? या फिर आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार की छत्रछाया फैली है?”
महात्माओं ने दी चेतावनी — अब होगा निर्णायक आंदोलन
महात्माओं ने संयुक्त रूप से एलान किया है कि यदि सरकार गंगा किनारे चल रहे अतिक्रमण, रिसॉर्ट और व्यावसायिक बारों को बंद नहीं करती, तो संत समाज हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा और अनशन आंदोलन शुरू करेगा।
> “गंगा की धारा से छेड़छाड़ करना देवभूमि का अपमान है। अब यह जन आंदोलन बनेगा, चाहे शासन कितना भी विरोध करे।”
गंगा — संस्कृति की सांस, विज्ञान का चमत्कार
गंगा न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी अद्वितीय जलधारा है।इसका जल सड़ता नहीं, बल्कि शुद्ध रहता है —यही कारण है कि इसे अमृत जल कहा गया है।फिर भी, हरिद्वार और ऋषिकेश में सीवर, प्लास्टिक, और औद्योगिक गंदगी का बहाव जारी है।
संतों का कहना है कि —
> “गंगा की रक्षा करना केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा है।”
निष्कर्ष
गंगा की रक्षा केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर भारतीय का धर्म है।हरिद्वार में बढ़ता अतिक्रमण और प्रशासन की चुप्पी अब जनता और संत समाज दोनों के लिए असहनीय बन चुकी है।“मां गंगा बचेगी तो भारत बचेगा — और यदि मां गंगा का अपमान होता रहा, तो यह केवल पाप नहीं, सनातन पर आघात होगा।”मां गंगा की शुद्धता और संरक्षण की लड़ाई के लिए महात्मा लगातार आवाज उठा रहे हैं।उनकी यह पुकार अब केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रही —
अलग-अलग विचारधारा और संगठनों के महात्मा एक स्वर में गंगा संरक्षण की घोषणा कर रहे हैं,
और बड़े आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं।
🕉️ देवभूमि की धरती से उठी यह पुकार अब दिल्ली के गलियारों तक जाएगी —क्योंकि मां गंगा केवल नदी नहीं, सनातन संस्कृति की शाश्वत श्वास हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े महात्मा के रूप में पहचाने जाने वाले महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि का वक्तव्य — “गंगा का अपमान, सनातन पर आघात” (अंतिम)
महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज ने भी आमात्रा रिजॉर्ट विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा —
> “गंगा हमारी आस्था की नहीं, अस्तित्व की धारा हैं। जो भी गंगा के तट को अपवित्र करेगा, वह पूरे भारतवर्ष की आत्मा को चोट पहुंचाएगा। अब संत समाज चुप नहीं रहेगा — शासन चाहे कितना भी दबाव बनाए, मां गंगा की रक्षा के लिए हम सत्याग्रह से पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती को ‘गंगा पुत्र’ की उपाधि दी और कहा — “गंगा संरक्षण की लड़ाई उन्होंने निष्पक्ष और देवता कृपा से लड़ते आए हैं। उनके साथ सभी महात्मा एक स्वर में खड़े हैं और यही एकता देवभूमि की रक्षा का प्रतीक है।”

















































































































































































































































































